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मैं वेबफा नहीं भाग 2

 


स्वाति ने अमन की तरफ कनखियों से देखा ...तो पाया कि वह तो स्वाति की तरफ़ पहले से ही देख रहा था। स्वाति को इस बात से मन ही मन खुशी हुई।


उसका मन अमन की तरफ पहली नजर में ही आकर्षित हो गया था। "शायद इसी को पहली नजर का प्यार कहते हैं!!! वह मन ही मन सोच रही थी ।


अगले स्टेशन पर कुछ सवारियां उतर गई ...तो अमन सामने वाली बर्थ पर आकर बैठ गया !


क्या करें ???

साइड से वह स्वाति को भली-भांति देख जो नहीं पा रहा था !!!


उफ !! यह कमबख्त इश्क..! ! ! ! ! 

उसका जादू  असर दिखाने लगा था ..!!!!


अमन ने बातचीत का सिलसिला जोड़ा :-


"वहां लखनऊ में आपका कोई रिलेटिव रहता होगा ?"


"नहीं !!"स्वाति ने मन में मचल रहे कई सवालों को दबाते हुए ऊपर से गंभीर बनते हुए कहा।


"अरे !! तब तो आपको दिक्कत होगी !"अमन नें चिंता जाहिर की..


स्वाति मन ही मन मुस्कुराई "जनाब !अभी दो पल का साथ नहीं हुआ ...और जमाने भर की चिंता ओढ़ ली!!!! बनावटी गंभीरता का चोला उसने अभी भी नहीं उतारा था।


"क्यों !! दिक्कत क्यों होगी ?? क्या जरूरी है... सभी पेपर देने वालों के रिलेटिव वहीं रहते हो ?" स्वाति ने चुटकी लेते हुए कहा। 


"नहीं !! में तो बस यूँ ही कह रहा था !!अमन झेंपते हुए बोला ।


अब फिर खामोशी छा गई ..,लेकिन दिल से दिल का कांटेक्ट हो रहा था ।जो बात स्वाति के मन को बेचैन कर रही थी वही बात अमन के दिल में भी मचल रही थी।


ऊपरी बर्थ पर एक व्यक्ति और भी था ..जो लेटा हुआ था और चेहरे को अखबार से ढके हुए था ...एक नजर से देखने से ऐसा लगता था ....कि जैसे वह सो रहा है।


पर ऐसा नहीं था। वह उनकी एक-एक भाव -भंगिमा को बड़े ध्यान से देख रहा था....और उनकी बातों को ध्यान से सुन रहा था।


पैसेंजर बदल रहे थे। आ रहे थे... जा रहे थे. पर वह.... जो ऊपर वाली बर्थ पर व्यक्ति लेटा हुआ था.... वह नहीं उतरा। ट्रेन एक स्टेशन पर रुकी।

अमन उतरा ,और दो कोल्ड ड्रिंक और समोसे ले आया।स्वाति की और बढ़ाते हुए बोला :-"लो कोल्ड ड्रिंक पियो और समोसे खाओ। 


स्वाति ने औपचारिकता बस मना किया ..लेकिन दूसरी बार कहते ही उसने ले लिया। अब बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया था:- "आप का सेंटर कहां है?" ज्योति ने अपने सेंटर का नाम बताया। 


"और आपका ?" स्वाति ने अमन से पूछा।

अमन ने बताया ।

प्रतिक्रिया में स्वाति बोली :-"फिर तो हमारा साथ यहीं तक है।क्योंकि हमारे सेंटर अपोजिट डायरेक्शन में है।कह कर उसने ठंडी सांस भरी।


बातचीत से औपचारिकता गायब हो गई थी ....और उसका स्थान

बेतकल्लुफी ने स्थान ले लिया था। सफर उनका पूरा होने वाला था...मंजिल आने वाली थी। 


अमन स्वाति का पता पूछ रहा था और मोबाइल नंबर मांग रहा था। ज्योति ने उसे अपना पता बता दिया था। अपना मोबाइल नंबर नोट करा दिया था जो उस ऊपर बर्थ वाले व्यक्ति ने भी नोट कर लिया था ज्योति ने अमन का मोबाइल नंबर ले लिया था। स्टेशन आ गया था  दोनों भारी मन से उतरे ..यहां से दोनों के रास्ते अलग- अलग हो रहे थे ।


स्वाति ने अमन से विदा ली ....और वे दोनों अपने -अपने गंतव्य को चले गए लेकिन एक दूसरे की याद साथ लेते चले गए थे। और पेपर देकर घर पहुंचने के बाद भी दोनों ही एक दूसरे को याद कर रहे थे। 


रात का समय था। स्वाति सोने की तैयारी कर  रही थी कि तभी मोबाइल की घंटी बजी। स्वाति ने रिसीव किया:-


" हेलो  !!"उधर से अमन बोल रहा था।  स्वाति तो बेचैनी से इंतजार ही कर रही थी

उसका दिल खुशी से भर उठा।


" पेपर कैसा हुआ था ?? अमन पूछ रहा था।


"अच्छा हुआ !! तुम्हारा ?? स्वाति ने पूछा।


"मेंरा पेपर ज्यादा अच्छा नहीं हुआ!!" अमन ने मायूसी से कहा। शायद मेरा भाग्य ही ऐसा है जो बार-बार मुझको धोखा दे जाता है। 


"निराश क्यों होते हो ?"स्वाति ने तसल्ली देने वाले स्वर में कहा। इस बार न सही ,अगलो बार सही होगा।


" चलो तुम्हारे मुंह से सुनकर मुझे तसल्ली हुई !!अब नींद भी अच्छी तरह से आएगी!!! हंसते हुए अमन ने कहा।

स्वाति एक बात कहनी है। अमन ने गंभीर स्वर में कहा।


"क्या ??स्वाति ने पूछा


"स्वाति!! मैं तुम्हें प्यार करने लगा हूँ।आई लव यू।




क्रमशः*********************************

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