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मैं बेवफा नहीं भाग 5

 

मैं बेवफा नहीं-पार्ट 5 


घर पर पुलिस पूछताछ करने आई हुई थी। जांच में पाया गया था कि कार के ब्रेक जानबूझकर फेल किए गए थे.... क्योंकि बलराज आहूजा ने बताया था.... कि कार बिल्कुल ठीक थी ...वैसे भी एक्सीडेंट की सिचुएशन से भी यही मालूम हो रहा था ...पर अब तो स्पष्ट हो गया था।


पुलिस इंस्पेक्टर विकास चंद्र ने बलराज आहूजा और शिवानी आहूजा से पूछा:-"कोई दुश्मनी तो नहीं है किसी से ?"


बलराज आहूजा ने कहा:-"मेरी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है!!


आगे उसने पूछा  :-"आपकी बहू कहां है ? स्वाति को बुलाया गया। 


स्वाति से भी पूछताछ की । बलराज आहूजा और शिवानी आहुजा ने कड़े शब्दों में कहा:-'मेरी बहू से कोई पूछताछ करके परेशान करने की कोई जरूरत नहीं  है।


मुझे अपनी बहू से कोई शिकायत नहीं है........और न ही मुझे उस पर किसी प्रकार की शंका है। उनके इस प्रकार के तेवर को देखकर विकास चंद्र ने कुछ नहीं कहा । 


बस इतना ही कहा:-"ठीक है।जांच पड़ताल होती रहेगी ...और 

भी कोई बात पूछनी होगी ...तो फिर दोबारा  आएंगे।"


इतना कह कर वह चला गया ।

लेकिन कोई बात नहीं पता चली थी। पुलिस पूछताछ करके चली गई थी। इस बिंदु पर भी छानबीन की गई थी कि बिज़नेस कंपटीशन का मामला तो नहीं है... लेकिन यह शंका भी निर्मूल निकली। 


अब एक ही बिंदु रह गया था ....कि कहीं उसका कोई अफेयर तो नहीं था।पुलिस की पड़ताल चल रही थी ...और एक दिन धमाका हुआ.... जब मालूम पड़ा कि विवेक का हत्यारा पकड़ लिया गया है।


सूचना आई थी कि हत्यारा स्वाति की जान-पहचान  का है। स्वाति को थाने में हत्यारे की शिनाख्त के लिए बुलाया गया था ।स्वाति थाने में पहुंची ....तो हत्यारे को देखकर.... बेहोश होते-होते बची। क्योंकि वह और कोई नहीं बल्कि अमन था।


अमन को देखते ही स्वाति के दिल में एक गुबार उठा जो अजीब तरह का था। प्यार का ..नफरत का ..क्रोध का ..और दुख का मिलाजुला गुबार था। साथ बीते पलों की कई यादें...उन यादों की खट्टी-मीठी  बातों के....कई एहसास एक साथ उसके दिल मैं उमड़ कर उसको तड़पा गए।


एक नजर उसने अमन को देखा ...अब वह पहले से और  भी ज्यादा स्वस्थ  और सुंदर दिखाई दे रहा था। अब स्वाति के दिल में  नफरत का भाव उभरा और उसने मुंह फेर लिया।


यह पहले से भी स्वस्थ है ...  इसका मतलब यह है ...कि यह मुझसे दूर रह कर भी खुश रहा ..  मेरी  कमी से जरा सा भी दुखी नहीं है। इस बात को सोचकर स्वाति को धक्का सा लगा ...उसने यह नहीं सोचा ....वह भी तो पहले से ज्यादा स्वस्थ है।


स्पेक्टर ने स्वाति से पूछा:-" आप इसको कब से जानती थी ?"


और कहा कि मैंने इस प्वाइंट पर विचार किया कि विवेक के अलावा ......आप की जब  हाल ही में शादी हुई है ...तो कहीं ऐसा तो नहीं  कि .....आपका ही  कोई अफेयर चलता हो .. और आपका ही कोई चाहने वाला ........मेरा मतलब है कि यह उसका भी काम हो सकता है।


देखिए न इस विषय में मैंने जब उस दिन आपसे पूछना चाहा था ....तो आप के सास-ससुर हत्थे से उखड़ गए ....और बड़ी सख्ती से कहने लगे कि मैं आप से कुछ न पूंछूं....और देखिए वही बात निकली। अरे ! हम पुलिस वाले हैं !!! 


हम तो अपने -अपनों पर भी शक करने लगते हैं ......तभी तो पड़ताल आगे बढ़ती है..... जब हमने इस विषय पर सोचा तो इसी विषय पर पड़ताल की,..... और छानबीन की ...तो पता चला ...कि आपका प्रेमी था। 


तभी तो आपने अपनी फर्म में इसे मैनेजर बना रखा था.. ताकि आप लोगों की प्रेम -लीला भी चलती रहे। 


"मेरी फर्म में मैनेजर ??"स्वाति बहुत जोर से चौकी। मैं तो यह बात जानती तक नहीं। मुझे तो पता भी नहीं!!"


ना.....ना ...ना...ना स्वाति जी !!! चौकिये नहीं??" अभिनय भी आप अच्छा कर लेती है !!!  चौंकिए मत !!  आपको सब  पता है!! एक दिन आपकी प्रेम लीला के बारे में आपके पति विवेक को पता चल गया ...और उसने आप के इस रिश्ते का विरोध किया।

इससे पहले कि और कुछ बात आगे बढ़ती...... तुम्हारे  इस प्रेमी ने उसे धीरे से रास्ते से हटा दिया!! केस आईने की तरह साफ है।


इतना कहकर उसने विजयी मुस्कान से इस तरह देखा.. कि जैसे  उसने बहुत बड़ा रहस्योद्घाटन किया है । इसे सवेरे  विवेक के साथ ही देखा गया था। सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में भी देखा है ...यह कार तक आया भी..... इसके फिंगरप्रिंट भी मिले हैं।


इतने सारे सबूत मिलने के बाद ही मैंने इसे गिरफ्तार किया है। और कारण भी है ....इसकी आपसे शादी होने को थी ...वह नहीं हो पाई फिर सोच विचार कर इसने प्लानिंग बनाई.. आपके पति की फर्म में इसने नौकरी की। इस बात का भी सबूत है कि इसने आपकी शादी के बाद ही नौकरी की ....और विवेक के साथ अपनी करीबी बढ़ाई और विश्वास पैदा कर लिया ।


विवेक उस पर विश्वास करने लगे थे ।वह उनके और करीब पहुंचने की कोशिश कर रहा था । उसमें वह कामयाब  हो गया और मौका पाकर उसने कार के ब्रेक फेल कर दिए। इस तरीके से उन्हें उसने रास्ते से हटा दिया।


स्वाति को उनकी इस मनगढ़ंत और बेसिर पैर की कहानी पर बहुत गुस्सा आ रहा था।उसकी इच्छा हो रही थी कि उठे और इस्पेक्टर का मुँह नोंच ले.... लेकिन वह कुछ नहीं कर सकती.थी...  उसने अपनी बात करनी शुरू की:-"हाँ इंस्पेक्टर साहब !! मैं इससे प्यार करती थी ...और मैं इससे शादी भी करना चाहती थी...मगर इस ने मुझको धोखा दे दिया .....फिर उसके बाद मैंने इससे कोई मतलब नहीं रखा।


मेरा इससे कोई भी संबंध नहीं रहा। मेरी शादी हो गई थी ..तब से मैंने इसकी आज सूरत देखी है...... और मुझ को तो पता भी नहीं था .....कि यह मेरी ही फर्म में काम करता था।


फिर बोली :-"इस्पेक्टर साहब !! इसे  जितनी सजा दी जाए ...वह कम है।अमन बड़ी ही दर्द भरी आवाज में बोला ,:-"स्वाति!!मैंने कुछनहीं किया है!! मेरी बात सुनो!!! वरना आगे तुम पछताओगी मैं तुम्हें ऐसी बात बताऊंगा !!कि तुम्हारे होश उड़ जाएंगे!!!


क्रमशः*********************

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