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मैं बेवफा नहीं अंतिम भाग

 

मैं बेवफा नहीं-पार्ट-7 अंतिम भाग


स्वाति को ...निशि की बातें सुनकर... झटके पर झटके लग रहे

थे। उसकी आंखों में भरे आंसुओं की वजह से निशि का चेहरा

उसे धुंधला सा दिख रहा था।


वह अपने ही  विचारों में खोए हुई थी।निशि की बातें भी उसके कानों में नहीं पहुंच पा रही थीं। वह तो जल्दी से जल्दी घर पहुंचना चाहती थी। निशि अपने घर वापस चली गई।


स्वाति ने जल्दी से इस्पेक्टर को फोन किया।लॉकर और डायरी की बात बताई। पुलिस की निगरानी में लॉकर तोड़ा गया तो डायरी, फोटोग्राफ्स तथा अन्य कागजात बरामद हुए ।


सब चीजों की जांच पड़ताल से जो कहानी सामने आई वह इस प्रकार थी.......…!!!


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विवेक आहूजा अपने कालेज लाइफ से ही दिलफेंक तबीयत का था। पैसों की कमी नहीं थी। आकर्षक रंग-रूप था। दिल खोल कर खर्च करने की आदत थी ...इस वजह से उसको दोस्तों की भी भीड़ काफी थी।


वह लड़कियों को पटाने में माहिर था। बातों -बातों में लड़कियों को फँसा लेता ...उनके साथ प्यार का नाटक करता.. मौज -मस्ती उड़ाता ....और दिल भर जाने पर किसी अन्य शिकार की तलाश में लग जाता था।


उसका गहरा दोस्त मधुकर ,उसके इन कुकर्मों का राजदार था। जब

कहीं,किसी लड़की के साथ विवेक घूमने जाता तो उनकी अंतरंगता के फोटोग्राफ्स मधुकर बना लिया करता था।वह फोटोग्राफ्स लड़कियों को काबू में करने के काम आते थे और इन कामों में मधुकर को बराबर विवेक से मोटी रकम हासिल होती रहती थी।


कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद मधुकर फोटोग्राफर बन गया था। वही काम उसने अपनी रोजी-रोटी के लिए अपना लिया था। अपनी बहन की उसे अभी शादी भी तो करनी थी। बूढ़ी मां और छोटी बहन के सिवा उसका कोई था भी नहीं ।


विवेक अपने पिता का बिजनेस सँभालने लगा था।


डायरी से राजफाश हुआ कि वह एक्सीडेंट नहीं ...बल्कि हत्या थी। उस गाड़ी के ब्रेक ही फेल कर दिए गए थे ..जिसमें उसकी पत्नी और बेटी की मृत्यु हो गई। 


इसका कारण विवेक जानता था ..अपने दिलफेंक स्वभाव के कारण उसने अपने दोस्त  मधुकर को भी नहीं बख्शा। जिस दोस्त ने उसके कुकर्मों में उसका साथ दिया। एक दिन वही उसके कुकर्मों का शिकार हो गया।


दोस्ती की आड़ में उसने उसकी बहन को भी अपने जाल में फांस लिया।सुहाने सपने दिखाकर ...और शादी का झांसा देकर उसके साथ रंगरेलियां मनाता रहा और नतीजा जब मालूम हुआ कि वह उसके बच्चे की मां बनने वाली है.... तो उसे बीच मझधार में छोड़ कर भाग गया ।


दिन -रात ,गलत तरीके से पैसे कमा कर ....जमा कर करके.. बहन की शादी का सपना देखते ....मधुकर को जब यह बात मालूम हुई .......तो उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई ।  उसने अपनी बहन को बहुत बेदर्दी से मारा और सब हाल पूछ कर वह विवेक आहूजा के पास पहुंचा ...और उससे ....अपनी बहन से शादी करने के लिए कहा तो ... अपनी दोस्ती का वास्ता दिया और अभी तक जो उसके सारे काम करता रहा।उन एहसानों की याद दिलाई तो .....विवेक ने उसकी बहुत बेइज्जती की  और कहां :-


"कहां राजा भोज कहां गंगू तेली ??तूने सोच भी कैसे लिया  ??

दोस्ती बराबर वालों में होती है ...और रही बात मेरा काम करने की ....तो उसके बदले में मैं तुझे हमेशा रकम देता रहा ..उस में कैसा एहसान??? फिर मधुकर उसके पैरों पर गिर गया कि मेरी बहन की जिंदगी का सवाल है .....तो विवेक ने उसे धक्के देकर निकलवा दिया।


घर आकर  उसने अपनी बहन को फिर लानत भेजी ...और कहा कि  ऐसी बहन का तो मर जाना ही ठीक है ,इससे अच्छा था कि वह वह मर जाती। और यह सारी बातें बताईं ....तो उसका दिल टूट गया उम्मीद टूट गई और उसी रात उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली ।


मधुकर तो अपनी बहन की धूमधाम से शादी करने का सपना देख रहा था ....उसको लाल जोड़े में सजाकर ससुराल रवाना करने का सपना देखता था ...उसकी लाश को देख कर लाश से लिपटकर फूट-फूटकर रोते हुए उसने सौगंध खाई कि वह इस बात का... प्रतिशोध विवेक से लेगा ....और उसका भी सत्यानाश कर देगा । 


जवान बेटी की मौत के गम में थोड़े ही दिनों में उसकी बूढ़ी मां भी चल बसी। अब वह अकेला रह गया था उसके दिमाग में बस यही धुन भरी रहती थी कि वह विवेक को भी सुखी नहीं रहने देगा!!! 


विवेक की शादी हो गई दो साल बाद लड़की का भी जन्म हुआ मधुकर कहीं गायब हो गया था। कुछ वर्ष बाद मधुकर  लौट आया था ....वह विवेक से क्षमा मांग कर ....और उसका विश्वास जीत कर फिर सेउसके साथ रहने लगा था।


मौका पाकर विवेक की गाड़ी के ब्रेक फेल कर दिए  और उसकी पत्नी और बेटी का एक्सीडेंट में देहांत हो गया ...इस प्रकार उसने पहली सफलता पाई। 

इतना होने पर भी विवेक अभी भी सुधरा नहीं था।

फोटोग्राफर होने के नाते मधुकर उसकी ताक में रहता था। उसके कई संगीन कुकर्मों की उसने वीडियो फिल्में और फोटो आदि बना रखे थे ...जो उसने वक्त -बेवक्त के लिए छुपा कर रख लिए थे। 


उसी दौरान एक दिन लखनऊ जाते समय उसकी नजर स्वाति पर पड़ी। स्वाति और अमन जब बातें कर रहे थे तो उसकी बराबर नजर स्वाति पर ही टिकी रही थी ....और यह तो उसके खून में था ......कि जो बात एक बार उसके मन में घुस जाती थी ..या 

जो चीज उसे भा जाती थी.. उसे वह हासिल करके ही छोड़ता था। 


जब अमन को स्वाति ने अपना फोन नंबर दिया  ..तो उसने भी वह नंबर नोट कर लिया ....और स्वाति को एक बार फोन करके उसका मन जानना चाहा.... जब स्वाति ने उसे डांट दिया ....और बताया कि वह अमन के सिवा और किसी से प्यार नहीं करती और न ही करेगी ..तो उसने दूसरी चाल चली। 


उसने स्वाति के पिता को अपने जाल में फँसाया। स्वाति के पिता ने अपना नया -नया काम शुरू किया था ...उन्हें कई बड़ी -बड़ी डील दिला कर उनका लाभ कराया …..फिर मधुकर की मदद से स्वाति और अमन के फोटो खिंचवाई ...और फोटो की एडिटिंग करवा 

कर उसके कई लड़कियों के साथ फोटो जोड़ दिए ...

हालांकि स्वाति के पिता भी यह पता लगा सकते थे... कि वह कैसा है ।


मगर वह तो स्वाति की शादी अमन से करना ही नहीं चाहते थे। इसीलिए उन्हें बहाना भी मिल गया था कि वह लूज कैरक्टर है।

जब स्वाति घर से निकलकर अमन का इंतजार कर रही थी ..तब स्वाति के घर से स्वाति की एक नौकरानी ने विवेक को फोन करके बता दिया था कि वह आज अमन से शादी करने जा रही है ।


वह नौकरानी छुप -छुप के सारी सूचनाएं विवेक को देती थी और उस से मोटी रकम प्राप्त करती थी। विवेक ने हीं अमन का एक्सीडेंट करवाया था। अमन अस्पताल में था ...उसी समय स्वाति से विवेक की शादी हो गई।


ठीक होने के बाद जब अमन को विवेक के यहां जाब मिली तो उसे पता नहीं था कि यह स्वाति का पति है।इधर मधुकर के पास  काफी पर्याप्त सामग्री हो गई थी.... अब वह विवेक को ब्लैकमेल करने लगा था ।वह  ब्लैकमेल कर करके  रकम भी वसूल रहा था और प्रतिशोध भी ले रहा था।


  स्वाति की शादी जब विवेक से हुई तो मधुकर बौखला गया ...वह तो उसका सर्वनाश चाहता था ..इसीलिए उसने विवेक का सफाया करने  की स्कीम बना ली। 


उसने स्वाति का बैकग्राउंड पता किया ..तो उसे मालूम हो गया कि वह अमन से प्यार करती थी .....और अमन विवेक के यहां जॉब कर रहा है ..तो उसे अपनी योजना को अमल जामा पहनाने में बहुत मदद मिली ।


अब उसने विवेक को धमकाना शुरू किया... विवेक को डर लगा कि किसी भी समय वह मेरी हत्या कर सकता है ...तो उसने सारी बातें डायरी में नोट करके  लॉकर में रख दी।


मधुकर का पुराना तजुर्बा काम आया ..और इस बार भी उसने कत्ल करने वही तरीका अपनाया... कार के ब्रेक फेल करके। मधुकर ने प्लान बनाया था कि इस तरीके से नाम अमन का हो जाएगा ...घर जाते समय जब विवेक को पता चला कि उसकी कार के ब्रेक फेल हो चुके हैं ...तो उसने अमन को फोन करके बताया. .....कि मेरी गाड़ी के ब्रेक फेल हो चुके हैं ....शायद मेरी हत्या की कोशिश है ....अगर मुझे कुछ हो जाए ...तो मेरी डायरी  लाकर में रखी हुई है ।


उस डायरी में सारे राज दफन है ...और उसके बाद फोन कट गया था ...उसका एक्सीडेंट हो गया था।अमन अपनी बात कहता रहा मगर उसकी बात किसी ने मानी नहीं !!जब मानी नहीं ..

.तो डायरी का उसने नाम भी नहीं लिया और अपनी बहन को बताया । बहन ने स्वाति को बताया। 


और ये सारा राज फाश हुआ ।अमन को छोड़ दिया गया ।मधुकर को गिरफ्तार कर लिया गया।


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आज स्वाति और अमन उसी पार्क में बैठे थे.....,जहां पहले वे मिला करते थे।स्वाति  को जिस दिन से अमन की हकीकत पता चली थी.....वह एक पल भी चैन से नहीं रही थी।वह अमन से क्षमा याचना करने गई थी। नजरें झुकाकर बोली:-"

"अमन मैं तो तुमसे क्षमा माँगने लायक भी नहीं हूँ।" फिर भी मुझे माफ़ कर दो!!"उसकी आँखों से आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।


"स्वाति!!मैंने कहा था न!!!मैं बेवफा नहीं हूँ, !!!!  तो मैं अब तुम्हें इस मुसीबत में कैसे छोड़ सकता हूं???तुम्हीं मेरे दिल में थीं,!!अभी भी हो...और मरते दम तक तुम्ही रहोगी!!!कहते हुए अमन 

ने उसका हाथ थाम लिया और कहा:-"आओ!!घर चलें!!


"कहाँ जाना है??यह बलराज आहूजा और शिवानी आहुजा की आवाज थी।

हमें पता था कि तुम यहीं मिलोगी!!! बेटी हमें माफ् कर दो!!हमनें बेटे के मोह में तुम्हारा जीवन बर्बाद किया तो हम ही सम्हालेंगे!! 

चलो अपने घर!!आखिर हमें कौन देखेगा।अमन !!अब तुम्ही मेरे बेटे हो!!


आज अमन और स्वाति की धूमधाम से शादी हो रही है ...जो बलराज और शिवानी ने संपन्न कराई है।अमन को उन्होंने अपना कानूनन वारिस बना दिया है।अमन के माँ-बाप ने इसकी सहर्ष स्वीकृति दे दी है।

                         


                                      समाप्त

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