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मैं बेवफा नहीं भाग 1


"अमन कितने बजे आ रहे हो?"

" क्या 11:00 बजे तक उसी पार्क में आ सकते हो?" जिसमें हम मिलते रहे हैं!! स्वाति ने घबराई हुई आवाज में कहा !!

"हां !मैं आ जाऊंगा !! पर बात क्या है ?? हमें बात तो बताओ !!"

"बात आने पर ही बताऊंगी !! बस तुम आ जाओ !"स्वाति ने उत्तर दिया।

11:00 बजे अमन पार्क में पहुंचा ...स्वाति दौड़कर अमन के पास पहुंची ...और बिना किसी भूमिका के एक सांस में बोल गई :-"अमन !! मेरी शादी तय हो रही है ...वह भी एक बड़े रईस बिजनेस मैन के साथ ....मगर अधेड़ व्यक्ति से !! इस शादी से मेरे पापा को बिजनेस में बड़ा लाभ होगा।

"अमन ऐसा करते हैं हम कोर्ट मैरिज कर लेते हैं !! कल ही भाग कर शादी कर लेते हैं "

!!क्या कह रही हो स्वाति ?"यह कैसे संभव है ?"

"कैसे नहीं संभव है ?"स्वाति गुस्सा होकर बोली !!"

अरे! तुमने पहले क्यों नहीं बताया ?" अम्न झुंझलाया।

"यह कोई प्रायोजित प्रोग्राम तो था नहीं ...जो मुझे पता था .और, मैं तुम्हें पहले बताती ...फिर तुम्हें इनवाइट करती।

मुझे तो कल पता चला कुछ करो अमन !  वरना मेरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी । यह मौका सोचने का नहींहै।  कुछ करने का समय है।"

"ठीक है ! तुम जैसा बताओ ,मैं वैसा ही करूंगा !!"अमन बोला।अब खुश??"

स्वाति ने कहा :-"कल हम भाग कर शादी करेंगे !

अमन ने कहा :-"ठीक है !! इसके अलावा और कोई रास्ता भी नहीं है !"

दूसरे दिन अपने कुछ कपड़े और रुपए लेकर स्वाति ..अपने पुराने मिलने वाले स्थान पर ...पार्क में जा पहुंची।

अमन ने कहा था कि वह वही आ जाएगा ।पार्क में स्वाति बड़ी बेचैनी से टहल रही थी। अब तक तो अमन को आ जाना चाहिए था। पर आया क्यों नहीं ?"

उसने उसका नंबर मिलाया पर फोन लग ही नहीं रहा था !अब तो वह बहुत बेचैन हो उठी ...दो-तीन घंटे बीत गए .,.समय सरकता जा रहा था ..,अमन फिर भी नहीं आया। अब  धीरे धीरे 4:00 बजे, फिर 5  -6  -7 शाम हो गई थी!! !

पार्क मेंउस समय बिल्कुल सुनसान हो गया था। पेड़ों के साए लंबे होने लगे थे। वह वही एक बेंच पर बैठ गई ...और रोने लगी धीरे-, धीरे रात भी हो गई ।इससे पहले कि उसके घर वाले ढूंढते हुए उसे आएं ....वह खुद ही घर चली गई ....और घर में बताया कि सहेली की बर्थडे पार्टी थी !!
आज रात स्वाति के लिए कयामत की रात थी !!उसे विश्वास हो गया था ...कि अमन ने उसे धोखा दिया है !! उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे ।उसने फिर अमन का फोन मिलाया ...पर वह स्विच ऑफ था ।
"क्यों किया तुमने  ऐसा अमन ?? वह मन ही मन कह उठी "मुझे धोखा देकर तुम्हें क्या मिलेगा ?" उसे वह दिन याद आया जब वह पहली बार अमन से मिली थी। एक कंपटीशन एग्जाम के पेपर के लिए उसे लखनऊ जाना था।
टिकट लेकर वह भागती हुई आई । ट्रेन चलने के लिए तैयार ही थी।  वह चढ़ने ही वाली थी कि वह  सामने से आती हुई एक महिला से टकरा गई ....उसका बैलेंस बिगड़ा और वह गिरती; उससे पहले ही उसके साथ ही आ रहे युवक ने उसे गिरने से बचा लिया ।
स्वाति ने सिर उठाकर देखा ।एक बेहद खूबसूरत युवक उसके सामने था ।पूछ रहा था :-"तुम्हें चोट तो नहीं लगी ?"
"नहीं !थैंक यू ,मुझे बचाने के लिए !!"उसका धन्यवाद करके वह  ट्रेन पर चढ़ गई !!उसी के पीछे- पीछे वह युवक भी ट्रेन में चढ़ गया।
हालांकि भीड़ बहुत थी मगर उन्हें सीट मिल गई ।युवक ने उससे कहा:-" हेलो !!  मेरा नाम अमन है! "
"आप का नाम?"उसने नजरें स्वाति के चेहरे पर जमाते हुए पूछा।
"मेरा नाम स्वाति"स्वाति ने मुस्कुराकर उत्तर दिया।
"आप कहां जा रही हैं?"उसने उत्सुकता से पूछा।
" मैं लखनऊ जा रही हूं " स्वाति को उससे बातें करना अच्छा लग रहा था।पता नहीं उसमें क्या बात थी।
"और आप !" स्वाति ने बात आगे बढ़ाई।
"मैं भी लखनऊ जा रहा हूं !" मेरा लखनऊ में पेपर है!अमन बोला।
"पेपर!!! पेपर मेरा भी तो है !!एक सुखद आश्चर्य था !!शायद उन दोनों के लिए ही!! जब हम दोनों को एक ही जगह जाना है ..फिर तो सुविधा हो जाएगी ...आराम भी रहेगा।

क्रमशः ******************************************


मैं वेबफा नहीं भाग  2  https://ashashuklaasha.blogspot.com/2021/07/2.html

2 Comments

  1. बहुत बढ़िया

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  2. फोलोअर्स का गैजेट लगाइए आशा जी

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